"You have your way. I have my way. As for the right way, the correct way, and the only way, it does not exist."
Friedrich Nietzsche

Saturday, April 27, 2019

किसी भी किताब का ज़िन्दगी में आना,
एक पुराने दोस्त का वापस मिलना है,
वो जानता है मेरे घर में
कौन से रस्ते से ताज़ा हवा आ सकती है,
और कौन से रस्ते से धूप !

- विवेक (27.04.19)

Wednesday, April 24, 2019

ताज़्ज़ुब है,
इतना वक़्त मैंने
खुद को सही साबित करने में क्यो लिया,
जबकी बीच बहस छोड़ कर
मैं दोपहर की नींद ले सकता था !

बहुत उदास हूँ
ये सोचकर भी,
की इतनी स्याही
नसीहतों को रंगने में क्यो खर्च की,
जबकी उससे
लिख सकता था खूबसूरत कवितायें
दुनिया के हर बच्चे के लिए !

इसलिये,
मैं अब हर दोपहर
सोना चाहता हूँ,
हर रात
लिखना चाहता हूँ !

- विवेक (24.04.19)

Sunday, March 31, 2019

मुझे बताया नहीं गया
मुझे पता चला
बहुत धीरे-धीरे
बहुत देर से
कि मैं अकेला नहीं हूँ!

मैं लिखता रहा रात भर
बुरी खबरें
और सुबह नहाते वक़्त
खुद को तैयार करता रहा
किसी एक खबर के लिए,
फिर देर रात खुश होता रहा
कि सब खबरें झूठी थी!
सफर पर निकलते वक़्त
तय करता रहा दुर्घटना का समय,
शरीर के हर इशारे को
दिया सबसे भयंकर नाम,
सोचता रहा
कौन रोयेगा मेरा मातम और कैसे?
और ऐसे नाटक लिखता रहा
जिसमें धड़कने आँसुओ हार जाती हैं।

मैंने लगाए सबसे दुःखद कयास,
जब घर पर किसी ने फोन न उठाया,
और खुश होते वक़्त डर के मारे
बड़ी सावधानी रखी
कि दुःखी होना न भूल जाऊ।
कोई खूबसूरत चीज, चेहरा, पल
नहीं लिया दोनों हाँथो में एक साथ,
और सबसे अच्छी तस्वीरों को
बचाता रहा खुद से,
जैसे आने से पहले ही ख़त्म
हो जाएगा सब कुछ,
इसलिए मेरे सबसे
उम्मीद भरे सपनो ने
परेशान किया सारी रात।

मैंने मदद माँगी
तो मुझसे कहा गया
की मैं गढ्ढे में गिरा हुआ हूँ,
मुझे बाहर आना चाहिए
जहाँ बड़ी रोशनी है,
ये सुनकर
मैंने इंतज़ार किया
मगर कोई सीढ़ी, कोई रस्सी
नहीँ आयी,
क्योकि सारी आवाज़े तो
वहीं साथ बैठी थीं।

मैंने दीवार पर लिख रखा था कि
'एक दिन मरेंगे हम सब, लेकिन
उससे पहले हर दिन जिएंगे'
और मैं इंतज़ार में ही रह गया
की कोई मुझे छूकर
यकीन दिलाये ये सब।

अधखुली आंखों से देखता हूँ,
मैं एक भीड़ में हूँ,
भीड़ घुप्प अंधेरे में है,
सब अकेले हैं,
इतने चिपके हुए हैं की
जगह ही नहीं
एक दूसरे को छूने की,
सबके पास वही मरहम है,
सबके पास वही इंतज़ार है,
ऊपर से आने वाली
किसी सीढ़ी का, किसी रस्सी का,
किसी रोशनी का !

- विवेक (31.03.19)

Friday, March 22, 2019

परदेसी हो,
तो ध्यान रखना.
घर जाके
अपना सामान मत फैला देना
चारो तरफ,
अपने आने की खबर की तरह.

घर की जमीन
बड़ी उपजाऊ होती है.
दो दिन में ही हर चीज
जड़ जमा लेती है,
उग आते है
छोटी-छोटी पत्तियां और फूल.
फिर लौटते वक़्त
आसान नहीं होता
उजाड़ना ये बागीचा,
और घर हाथ पकड़ कर रोकता है
हर पौधे को.

हाथ छुड़ा कर
वापस लौटने का ये अफ़सोस,
परत दर परत इकठ्ठा हो रहा है,

इतनी परतों के नीचे
कितनी सांसे ले पाओगे?

- विवेक (22.03.19)

Monday, March 11, 2019

The Migrant

"There is no way to happiness, Happiness is the way." - Buddha

Wednesday, November 28, 2018

"तुम पिता थे"


तुम्हारे बच्चे भूखे थे,
और उन्हें यक़ीन था
तुम पर,
लेकिन जब तुम
उनके पैसों से,
रोटी की जगह,
अपने ख़ुदा के लिए
फूल खरीद लाये,
तब उन मासूमों ने आँखों से
जो भीगें हुए सवाल दागे,
उससे बहुत बड़ी दरारें पड़ गयीं
तुम्हारे मंदिरों में,
देखो उन दरारों को,
देर मत करो,
शायद उनमें अब भी
इतनी जगह हो,
कि तुम्हारी आत्मा निकल सके बाहर,
और आज़ाद हो जाये !!!

- विवेक (26.11.18)

Tuesday, August 22, 2017

ज़िन्दगी कुछ कह रही थी


एक दिन जब रात की छत टिमटिमा कर गा रही थी.
चाँद की हल्की सी आहट बादलों से आ रही थी.
गुनगुनाती याद उसकी चांदनी पर बह रही थी.
उस घड़ी उस वक़्त शायद ज़िन्दगी कुछ कह रही थी.

एक दिन जब मेरा कमरा सिर्फ मुझको सुन रहा था.
एक झरोखा कोई सपना धूप के संग बुन रहा था.
दो परिंदों की ठिठोली खिडकियों पे रह रही थी.
उस घड़ी उस वक़्त शायद ज़िन्दगी कुछ कह रही थी.

एक दिन जब चार आँखे एक आंसू रो रहीं थी.
खूबसूरत थी उदासी मुस्कुराहट सो रही थी.
रौशनी की हर ईमारत जब क्षितिज पर ढह रही थी.
उस घड़ी उस वक़्त शायद ज़िन्दगी कुछ कह रही थी.

- विवेक (२००१)

Sunday, August 13, 2017

आखिरी पन्ने पे जाके मिला है पहला सबक,
ख्वाहिशे बोने पे अफ़सोस के फूल आते हैं.

घर पे वापस बुला ले कोई इसलिए हर बार,
अपनी कोई चीज़ रख देते हैं, भूल आते हैं.

शहर में आना ही इक जुर्म है इतना गहरा,
कोई गुनाह करे, हम क़ुबूल आते हैं.

रहनुमाओं से सबक सोच-समझ के लेना,
एक ही रंग में साजिश और उसूल आते हैं.

- विवेक
१३.०८.२०१७

Thursday, February 18, 2016

'तुम्हारा होना'

"There is no way to happiness, Happiness is the way." - Buddha